Eratos Guest Book

Fait avec Padlet

Guest Book - Livre d'Or - Libro degli Ospiti

 

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Blog

Πειραματικό Γυμνάσιο Αγίων Αναργύρων

 Από την Αθήνα και το  Πειραματικό Γυμνάσιο Αγίων Ανργύρων στην Ελλάδα στέλνουμε τα χαιρετίσματά μας στους μακρινούς συμμαθητές μας που συμμετέχουν στο πρόγραμμα του Ερατοσθένη.Πιστεύουμε οτι μέσα απο το πρόγραμμα έχουμε καταφέρει με ένα διασκεδαστικό πείραμανα γνωρίσουμε παιδιά απο όλο τον κόσμοκαι να διαδώσουμε ενα όμορφο μήνυμα σε σχολεία που βρίσκονται σε άλλες χώρες

Αλκμήνη , Σταυρούλα, Μαρία,  Καλλιόπη- Χριστίνα,  Γεωργία,  Αναστασία.

 

Είναι η δεύτερη χρονιά που συμμετέχουμε στο πρόγραμμα και συμμετέχουμε με ακόμη μεγαλύτερο πάθος!

Ειναι χαρά μας που μπορέσαμε και εμπνεύσαμε με τη συμμετοχή μας τόσα Ελληνικά σχολεία και στο φετεινό πρόγραμμα συμμετέχουν περισσότερα από 20 Ελληνικά σχολεία όλων των βαθμίδων.

Ένα μεγάλο ευχαριστώ σε όλους τους συμμετέχοντες που με τις δραστηριότητές τους μας προτρέπουν για μια τόσο ενεργή συμμετοχή και συνεργασία.

Rio de Janeiro

Este Projeto une os continentes com um único objetivo. Medir a sombra e comprovar o cálculo realizado por Eratóstenes a mais de 2000 anos.
This project unites the continents with a single goal. Measure the shade and check the calculation made by Eratosthenes over 2000 years.

Projek Eratosthenes Di SMK St Thomas (Kuantan - Malaysia)

 Kami telah mengambil bahagian dalam projek ini sejak tahun 2010. Pelajar-pelajar sekolah ini amat gembira kerana dapat mengaplikasikan konsep-konsep Matematik dalam pengukuran lilitan Bumi. Selain itu, kami dapat mengenali cikgu-cikgu dan pelajar-pelajar di seantero dunia. Pada tahun ini, kita sempat melakukan eksperimen ini dengan pelajar-pelajar Kolej Hazel Glen, Australia pada bulan Mac. Projek ini sangat efektif kerana murid bukan sahaja belajar Matematik, mereka juga belajar Geografi, Astronomi dan Sains serta-merta. Pelajar-pelajar kita amat berdedikasi dan bertanggungjawab terhadap projek ini setiap masa sehingga kita mendapat keputusan yang boleh dipercayai. Pada bulan Jun yang akan datang, kami akan menjalankan eksperimen di tempat lain, iaitu di United Kingdom. Satu kumpulan pelajar akan menjalankan eksperimendi Pantai teluk Cempeduk, Kuantan pada masa yang sama.

1ο ΓΥΜΝΑΣΙΟ ΑΙΓΙΟΥ, ΕΛΛΑΔΑ

Χαιρόμαστε που συμμετέχουμε σε ένα από τα πιο όμορφα επιστημονικά πειράματα της Φυσικής, που ξεκίνησε από έναν πρόγονό μας. 

 

Μέσα από το πρόγραμμα κερδίζουμε πολύτιμες γνώσεις σε διάφορα γνωστικά αντικείμενα, όπως Μαθηματικά, Φυσική, Ιστορία, Γεωγραφία, Αστρονομία, Φυσική κ.α.  

 

Είναι πολύ ωραίο να μοιραζόμαστε τα αποτελέσματα και τα συμπεράσματά μας με σχολεία από όλον τον κόσμο.  

 

Είμαστε περήφανοι που ανήκουμε και εμείς σε αυτήν την ωραία ομάδα!

 

4ο ΓΥΜΝΑΣΙΟ ΠΕΤΡΟΥΠΟΛΗΣ, ΕΛΛΑΔΑ

Το σχολείο μας συμμετείχε στο πρόγραμμα Εratosthenes 2014 και συνεχίζει στο Eratosthenes 2015  στα πλαίσια των μαθημάτων Φυσικής Α' Γυμνασίου. 

 

Το πρόγραμμα Ερατοσθένης αφορά τη συνεργασία (ταίριασμα) μετρήσεων μήκους ενός γνώμονα κάθετα τοποθετημένου στο έδαφος και της σκιάς του, την ώρα της ηλιακής μεσημβρίας. Οι μετρήσεις μας  συνδυάζονται με τις αντίστοιχες μετρήσεις άλλου σχολείου έτσι ώστε να προσεγγιστεί η περιφέρεια της Γης κατά τον μεσημβρινό. Αποτελεί επανάληψη του πειράματος του Ερατοσθένη που έγινε 2200 π.Χ.  

 

Ο σκοπός της δικής μας συμμετοχής στο πρόγραμμα ήταν να αντιληφθούν τα παιδιά βιωματικά, ότι και οι πιο απλές μετρήσεις απαιτούν τη μέγιστη δυνατή ακρίβεια, προσεγγίζοντας μια πραγματική πειραματική διαδικασία κι επιπλέον,να επικοινωνήσουν τη δουλειά τους σε συνομηλίκους τους, που μοιράστηκαν ανάλογη εμπειρία.

 

Είμαστε ιδιαίτερα χαρούμενοι, όταν σε μια απο τις μετρήσεις μας, τον Μάρτιο, σε συνεργασία με σχολείο της Σλοβενίας πετύχαμε μέτρηση ακριβώς ίδια με αυτή του Ερατοσθένη, δηλαδή 40000km.

 

Ο ενθουσιασμός με τον οποίο εργάζονται τα παιδιά, η αγάπη τους για το πρόγραμμα και η ανάγκη τους να το μοιραστούν και με την υπόλοιπη σχολική κοινότητα, είναι τα ισχυρότερα κίνητρα για να συνεχίσουμε να συμμετέχουμε. το πρόγραμμα της Βιβλιοθήκης είναι επίσης μια εμπνευσμένη ιδέα που πολλές φορές μας έβγαλε από τη δύσκολη θέση, λύνοντάς μας απορίες, προτείνοντας δραστηριότητες, καθοδηγώντας μας στις μετρήσεις και προσφέροντας τα κατάλληλα εργαλεία για να κάνουμε τους υπολογισμούς που χρειαζόμαστε. Το χρησιμοποιούμε σαν αναφορά σε κάθε μας μέτρηση, ξεκινώντας από την Εφημερίδα κι επιστρέφοντας για τους υπολογισμούς. Οι φωτογραφίες μας εχουν εμπνεύσει επίσης για να δοκιμάσουμε διαφορετικούς γνώμονες, να εντοπίσουμε και να διορθώσουμε λάθη που έχουμε κάνει σε μετρήσεις και για να διοργανώσουμε special ημέρες μετρήσεων, όπως αυτήν της πρωταπριλιάς 2015.

 

Ευχαριστούμε όλους τους  συμμετέχοντες για την υπέροχη συνεργασία κι επικοινωνία που είχαμε μέχρι σήμερα και ευχαριστούμε ιδιαίτερα τον ιδρυτή του, κ. Eric Vayssie,  για την ευκαιρία που μας προσέφερε.

 

 

सूर्य क्यों जरूरी है हमारे लिए

जानिये क्यों जरूरे है सूर्य हमारे लिए?

 
धूप उर्जा और प्रकाश का मूलभूत स्रोत होने के कारण पृथ्वी और उसके सहवासियों तथा वनस्पतियों और जीवधारियों के लिए सूर्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसीलिए प्राचीन काल से ही सूर्य की ओर श्रद्धा के साथ लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ है। भूमंडल के भिन्न भिन्न भागों में धूप की प्रकृति और धूप के दैनिक तथा वार्षिक परिवर्तनचक्र को ठीक ठीक समझने के लिए सूर्य और पृथ्वी की सापेक्ष गति का यथार्थ ज्ञान आवश्यक है। सौर परिवार में पृथ्वी स्थिर पिंड नहीं है। सूर्य को व्यवहारत: स्थिर मानने पर अपनी धुरी पर परिभ्रमण करने के कारण ही पृथ्वी पर दिन और रात होते हैं। ऋतुपरिवर्तन के साथ एक ही साथ पर दिवालोक की अवधि में परिवर्तन और वर्ष के एक ही विशेष दिवास में भिन्न भिन्न स्थान पर दिवाकाल की विभिन्न अवधि का कारण पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा करना है। पूरे एक वर्ष के समय में पृथ्वी ९४ x १० किमी. लंबी दीर्घवृत्ताकार कक्षा पर सूर्य की परिक्रमा करती है। इस दीर्घवृत्त के फोकसों में से एक पर सूर्य की स्थिति होती है। जनवरी में निकटतम अनुसूर्यविंदु (perihelion) से होकर गुजरते समय पृथ्वी लगभग ५x १० किमी. सूर्य के निकट पहुँच जाती है। यह सूर्य के निकटतम पृथ्वी की स्थिति है। जुलाई और जनवरी में पृथ्वी सूर्य से क्रमश: लगभग १५१x १० किमी. और १४६x १० किमी. दूरी पर रहती है। भूकक्षा सूर्य से गुजरनेवाले समतल में तो स्थित है, किंतु भूअक्ष इस समतल पर लंब नहीं है, अपितु वह इस समतल से २३.५ डिग्री का कोण बनाता है। परिक्रमा की प्रत्येक स्थिति में भूअक्ष पूर्ववर्ती और परवर्ती स्थिति के समांतर होता है। सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की वार्षिक गति के कारण खगोल (celestial sphere) में २१ जून को सौर अवनमन २३.५ डिग्री उत्तर, २१ मार्च को ० डिग्री , २१ दिसंबर को २३.५ डिग्री दक्षिण और २३ सितंबर को पुन: ० डिग्री होता है। पृथ्वी के उत्तरी या दक्षिणी ध्रुवों में से एक विभिन्न मासों में सूर्य की ओर और दूसरा सूर्य से परे झुका होता है। इसके कारण पृथ्वी के दैनिक परिभ्रमण के साथ विषुव प्रदेश को छोड़ अन्य सभी स्थानों पर विभिन्न महीनों में दिवालोक की अवधि बदलती रहती है। यह स्पष्ट है कि दिसंबर में जब भू-अक्ष का उत्तरी सिरा सूर्य से परे होता है, तब उत्तरी गोलार्ध में दिन की अपेक्षा रातें बड़ी होती हैं और दक्षिणी गोलार्ध में रातों की अपेक्षा दिन बड़े होते हैं। इस समय उत्तरी शीत कटिबंध में सूर्यप्रकाश बिलकुल नहीं होता और दक्षिणी शीत कटिबंध में चौबीसों घंटे प्रकाश रहता है। जून में परिस्थिति उलट जाती है। उत्तरी गोलार्ध में दिन बड़े और रातें छोटी और दक्षिणी गोलार्ध में दिन छोटे और रातें बड़ी हो जाती हैं। इस समय उत्तरी शीत कटिबंध में दिन ही दिन होता है, रात्रि नहीं होती और दक्षिणी कटिबंध में रात ही रात होती है, दिन नहीं होता। मार्च और सितंबर में एक विशिष्ट दिन सूर्य के भूमध्य रेखा पर स्थित होने के कारण, समस्त पृथ्वी पर दिन और रात बराबर होते हैं। उत्तरी और दक्षिणी शीत कटिबंधों में छमाही दिन या छमाही रात के संक्रमण काल का यह समय होता है। इस प्रकार विषुवत् प्रदेश को छोड़ कर पृथ्वी के सभी स्थानों पर दिवालोक की अवधि वर्ष भर बदलती रहती है। किसी स्थान पर सूर्योदय से पूर्व और सूर्यास्त के बाद जितनी देर तक सूर्य की किरणें वायुमंडल द्वारा अपवर्तित (refracted) होकर पहुँचती हैं, उतनी देर वहाँ सांध्य प्रकाश (twilight) रहता है। विषुवत् प्रदेश से ध्रुव प्रदेश की ओर बढ़ने पर सांध्य प्रकाश की अवधि बढ़ती जाती है। ध्रुव प्रदेशों में सांध्य प्रकाश का विशेष महत्व है, क्योंकि वर्ष के अधिकांश काल में वहाँ सीधी धूप नही प्राप्त होती।

Hacia el Equinoccio de Primavera en el hemisferio sur 21 de setiembre (Argentina)

 Comenzamos a prepararnos pára crear nuevos gnomones que nos den precision en las mediciones. Mediremos desde Anisacate y tambien desde Cordoba Capital con el Profesor Andres Sagristani. Contamos siempre con la colaboracion de nuevos socios y los amigos con loos que compartimos todo este tiempo.

बालीवुड नून डे के अवसर पर बच्चो ने पृथ्वी की परिधि नापी

 बालीवुड नून डे के अवसर पर बच्चो ने पृथ्वी की परिधि नापी

 

पन्द्रह मई को मुंबई नून डे होता है इस अवसर पर हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक व सी वी रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर के सयुंक्त तत्वाधान में वासनजी एकेडमी मुंबई, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर के साथ विश्व भर के दस देशों के बच्चों ने अंतर्राष्ट्रीय इरेटोस्थनीज संस्था के साथ मिल कर पृथ्वी की परिधि मापी। इस इरेटोस्थनीज संस्था के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक फ्रांस के मिस्टर एरिक वायसी हैं जिन्होंने महान दार्शनिक व वैज्ञानिक इरेटोस्थनीज (276-194 ईसा पूर्व) को याद करने व उनके द्वारा विकसित किये गए तरीके से पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने की संस्था बनायी हुई है।

आज इस प्रयोग में भारत से विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल व मुंबई से विशाल जे सावंत ने अपनी टीम को प्रयोग करवाए, इस प्रयोग के माध्यम से बच्चों को गणित, खगोलशास्त्र, भूगोल व भौतिकी के जटिल तथ्य समझने का अवसर मिलता है और बच्चों में  गणितीय गणनाओं का कौशल विकसित होता है। 22 विद्यार्थियों ने प्रधानाचार्य के मार्गदर्शन में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित बाईस सौ वर्ष पुराना पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया गया। इस प्रयोग के महत्त्व पूर्ण घटक के रूप में सूर्य की धूप में बनी नोमोन नामक शंकु यंत्र की परछाई से सूर्य कोण ज्ञात करते हैं। पाँच-पाँच विद्यार्थियों का समूह बनाकर जमीन पर लंबवत खड़ी नोमोन (शंकु यंत्र) की परछायी को चार-चार मिनट के अंतराल पर नाप कर दर्ज किया गया। छड़ी की परछायी जब न्यूनतम हो जाती है तो उसे माप लेते हैं और त्रिकोणमिति के सूत्रों की सहायता से सूर्यकोण ज्ञात कर लेते हैं। इसके बाद विशेष प्रकार की गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात की एक साल में चार बार 21 मार्च (दिन और रात बराबर), 21 जून (सबसे लंबा दिन), 23 सितम्बर (दिन और रात बराबर) व  21-22 दिसम्बर (सबसे छोटा दिन) को प्रगति विज्ञान संस्था मेरठ व इरेटोस्थनीज संस्था फ्रांस के साथ मिल कर विश्व के फ्राँस, अर्जेंटीना, स्पेन, मलेशिया, जर्मनी, कनाडा, स्लोवेनिया, मोरक्को, रोमानिया, सर्बिया, माल्टा, मिश्र तथा अमेरिका आदि देशों के बच्चे भारत के हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू तथा कश्मीर, गुजरात, असम, महाराष्ट्र इत्यादि राज्यों के बच्चो के साथ मिल कर यह प्रयोग करते हैं।

 

कौन कौन करवाते हैं यह प्रयोग 

यह प्रयोग यमुनानगर में हरियाणा विज्ञान मंच के जिला समन्वयक दर्शन लाल बवेजा करवाते है, इस प्रयोग के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक फ्रांस के मिस्टर एरिक वायसी हैं जिन्होंने महान दार्शनिक व वैज्ञानिक इरेटोस्थनीज (276-194 ईसा पूर्व) को याद करने व उनके द्वारा विकसित किये गए तरीके से पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने की संस्था बनायी हुई है।

 

भगोलिक व गणितीय विधियों का होता है प्रयोग        

बच्चों को समझाते हुए दर्शन लाल ने बताया कि साल में दो बार यह स्थिति आती है, जब पृथ्वी अपनी धुरी पर या तो सूर्य की ओर झुक जाती है या उससे काफी दूर हो जाती है। इसके कारण सूर्य या तो आकाश में सर्वाधिक उत्तर में या दक्षिणतम छोर पर पहुंच जाता है। शीत अयनांत के दिन उत्तरी ध्रुव सूर्य से दूर हो जाता है जबकि दक्षिणी ध्रुव सूर्य की ओर हो जाता है। उन्होंने कहा कि सूर्य उत्तरी क्षेत्र में आकाश में न्यूनतम ऊंचाई पर प्रकाशमान होता है और दक्षिणी क्षेत्र में आकाश में सूर्य अधिकतम ऊंचाई पर प्रकाशमान होता है। जिस कारण पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे छोटा दिन और पृथ्वी के दक्षणी गोलार्द्ध में सबसे लंबा दिन होता है। इसी कारण से उत्तरी गोलार्द्ध में बहुत सर्दी होती है।   

ΙΟΑΝΝΙΝΑ-ΕΛΛΑΔΑ

Είμαστε τόσο χαρούμενοι για την συνεργασία και την επικοινωνία μέσω του προγράμματος.

Ο Ερατοσθένης θα ήταν υπερήφανος για εμάς. Ευχαριστούμε πολύ!

Lafrançaise - France

We created this eTwinning project, to celebrate the 10 years of Eratosthenes project on eTwinning.
Thanks to all members! All the contributions, even the smallest were useful to compile all those data in this collaborative Twinspace.

 

Showing 10 results.